झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। खाली हो रही दो राज्यसभा सीटों में से एक सीट पर कांग्रेस की दावेदारी लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन उम्मीदवार के चयन को लेकर नया राजनीतिक समीकरण शनिवार को सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी और टिकट भी कांग्रेस ही देगी, लेकिन उम्मीदवार के नाम पर अंतिम सहमति मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पसंद से बनेगी।
इसी सिलसिले में तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू शनिवार सुबह एक बार फिर मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ करीब एक घंटे तक चर्चा की। बैठक के बाद दोनों नेता लौट गए। विक्रमार्क तेलंगाना रवाना हो गए, जबकि के. राजू शाम की फ्लाइट से नई दिल्ली के लिए रवाना हुए।
झारखण्ड सीएम सोरेन
चेहरे पर फंसा पेंच, समझौते के करीब कांग्रेस-झामुमो
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस और झामुमो के बीच राज्यसभा सीट को लेकर सहमति बन चुकी है। हालांकि उम्मीदवार के नाम को लेकर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। माना जा रहा है कि दोनों दल ऐसे चेहरे की तलाश में हैं, जिस पर गठबंधन के सभी घटक सहज रूप से सहमत हो सकें।
यह पहला मौका नहीं है जब दोनों दलों के बीच ऐसा फार्मूला सामने आया हो। मार्च 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी इसी तरह का समझौता हुआ था। उस समय कांग्रेस विधायक सरफराज अहमद झामुमो के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे। बाद में उनकी खाली हुई विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी।
झामुमो का चुनावी चिन्ह
कांग्रेस नेताओं को मिले समझौते के संकेत
बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों को समझौते की दिशा में सकारात्मक संकेत दिए। मुख्यमंत्री आवास में हुई चर्चा के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश भी मौजूद रहे।
बाद में स्टेट गेस्ट हाउस में कांग्रेस नेताओं से मुलाकात करते हुए के. राजू ने कहा कि विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से हुई बातचीत के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को सौंपी जाएगी।
विधायकों ने रखी अपनी नाराजगी
गौरतलब है कि शुक्रवार को के. राजू ने कांग्रेस के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग बैठकें की थीं। इस दौरान कई विधायकों ने संगठन के भीतर अपनी नाराजगी भी जाहिर की। कुछ नेताओं ने शिकायत की कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी उनकी भावनाओं और सुझावों को पर्याप्त महत्व नहीं देते।
हालांकि फिलहाल पार्टी नेतृत्व का पूरा फोकस राज्यसभा चुनाव की रणनीति और गठबंधन के भीतर सामंजस्य बनाए रखने पर है। ऐसे में आने वाले दिनों में उम्मीदवार के नाम को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।