पर्यटन नगरी मसूरी में तिब्बती महिला संगठन के नेतृत्व में तिब्बती समुदाय के लोगों ने 11वें पंचेन लामा की रिहाई की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला। हैप्पी वैली से शुरू हुआ मार्च लाइब्रेरी चौक होते हुए बडोनी चौक तक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने मोमबत्तियां और पंचेन लामा की तस्वीरें हाथ में लेकर शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया।
6 साल का बच्चा सालों से लापता
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 11वें पंचेन लामा को साल 1995 में मात्र 6 साल की उम्र में उनके परिवार सहित कथित रूप से हिरासत में लिया गया था और पिछले 31 साल से उनके बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। तिब्बती महिला संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 14 मई 1995 को गेदुन चोएक्यी न्यिमा को 10वें पंचेन लामा का वास्तविक पुनर्जन्म घोषित किया था। इसके कुछ दिन बाद ही उनके लापता होने की घटना सामने आई। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि चीन सरकार तिब्बती धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान में हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने इसे मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया।

3 दशकों से न्याय की मांग
तिब्बती समुदाय के लोगों ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से मामले में हस्तक्षेप कर पंचेन लामा की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तिब्बती समाज पिछले 3 दशकों से लगातार न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में तिब्बती समुदाय के लोग शामिल रहे। पूरे मार्ग पर शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकालते हुए लोगों ने तिब्बती धार्मिक अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की अपील की।
सुनील सोनकर की रिपोर्ट