Delhi HC On Dhurandhar Film: 'धुरंधर' फिल्म एक बार फिर चर्चा में बनी हुई है। इस बार फिल्म अपनी पॉपुलैरिटी की वजह से नहीं बल्कि एक बार फिर फिल्म कोर्ट पहुंच गई है। फिल्म को लेकर एक एक सैन्यकर्मी ने याचिका दायर की है। उसने याचिका में दावा किया गया कि- 'फिल्म में कुछ ऐसे सीन्स हैं, जिनमें सेना और सुरक्षा बलों द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियों, ऑपरेशनल तरीकों और संवेदनशील लोकेशनों को बहुत स्पष्टता के साथ दिखाया गया है।'
इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने एक इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड (CBFC) को जांच करने के निर्देश दिए है।
'धुरंधर' के खिलाफ सैन्यकर्मी ने दायर की याचिका
एक सैन्यकर्मी ने 'धुरंधर' के खिलाफ याचिका दायर की और खुद भी कोर्ट में उपस्थित हुएं, उन्होंने दावा किया कि- 'फिल्म में कुछ ऐसे सीन्स हैं, जिनमें सेना और सुरक्षा बलों द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियों, ऑपरेशनल तरीकों और संवेदनशील लोकेशनों को बहुत स्पष्टता के साथ दिखाया गया है, और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।'
उन्होंने आगे कहा कि-
'याचिकाकर्ता का कहना है कि भले ही फिल्म को 'फिक्शन' बताया गया हो, लेकिन इस तरह का चित्रण देश की सुरक्षा और अखंडता के हित में नहीं माना जा सकता। यह उसके लिए खतरा है।'

HC कोर्ट की सुनवाई
HC में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि- 'फिल्मों का प्रभाव केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता। बेंच ने उदाहरण देते हुए कहा कि- 'यदि किसी फिल्म में आत्महत्या से पहले ऑनलाइन तरीके खोजने जैसे सीन्स विस्तार से दिखाए जाएं, तो यह सवाल उठता है कि क्या ऐसे चित्रण 'उद्देश्यपूर्ण' हैं?'
कोर्ट ने कहा कि-
'फिल्मों के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता और इसी कारण सेंसरशिप और दिशानिर्देशों की जरूरत पड़ती है।'
क्या बोला दिल्ली हाई कोर्ट?
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट ने बताया कि- 'उन्होंने 23 मार्च 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व भी भेजा था, जिसमें फिल्म के कई सीन्स पर आपत्ति जताई थी। उसने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की है।'
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि-
'याचिका को प्रतिनिधित्व मानते हुए सक्षम प्राधिकारी पूरे मामले पर विचार करे और जरूरी लगने पर 'सुधारात्मक कदम' उठाए। साथ ही, लिया गया निर्णय याचिकाकर्ता को भी सूचित किया जाए।'