सुबह उठते ही मोबाइल चेक करना बढ़ा सकता है मानसिक तनाव!

सुबह की आदतें और मानसिक तनाव

सुबह उठते ही मोबाइल चेक करना बढ़ा सकता है मानसिक तनाव!

विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह उठते ही मोबाइल पर ईमेल और सोशल मीडिया चेक करने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है। नर्वस सिस्टम पर दबाव पड़ता है और कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है।

सुबह उठते ही मोबाइल चेक करना बढ़ा सकता है मानसिक तनाव

सुबह उठते ही मोबाइल चेक करना बढ़ा सकता है मानसिक तनाव! |

अगर सुबह उठते ही आपकी भी मोबाइल चलाने की आदत है, या आफ अलार्म की तेज आवाज से जगते,  ईमेल, WhatsApp मैसेज, सोशल मीडिया नोटिफिकेशन या न्यूज अपडेट चेक करते है। तो यह आपका मानसिक तनाव बढ़ा सकता है। ज्यादातर लोगों की आदत होती हैं कि सुबह उठते न्यूज और मैसेज देखने की। यह आदत देखने में तो नॉर्मल लगती है। लेकिन इसका असर आपके मस्तिष्क पर पड़ता है। आइए जानते हैं क्या कहती है रिपोर्ट

सुबह की ये आदते पड़ सकती हैं भारी 

आजकल ज्यादातर लोग जैसे ही बिस्तर से उठते हैं तो वो तुरंत मोबाइल उठा लेते हैं। उसमें वर्क ईमेल,  मैसेज, बुरी खबर या किसी का फेसबुक स्टेटस देखते हैं, फिर इससे आप खुद की तुलना उनसे करने लगते हैं। ये बातें सीधे आपके नर्वस सिस्टम के 'फाइट ऑर फ्लाइट' मोड को एक्टिवेट कर देती हैं, इस वजह से शरीर में कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) का लेवल बढ़ जाता है। फिर पूरे दिन थकान, एंग्जायटी महसूस होती है।

क्या होता है कॉर्टिसोल?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का कहना है कि- 'कॉर्टिसोल को आमतौर पर 'स्ट्रेस हार्मोन' (तनाव का हार्मोन) कहा जाता है, लेकिन इसका काम सिर्फ तनाव बढ़ाना ही नहीं है, यह शरीर के सबसे जरूरी कामों को भी कंट्रोल करता है।

यह एड्रिनल ग्रंथियों से बनने वाला एक जीवन रक्षक स्टेरॉयड हार्मोन है, जो हमारे जीवित रहने के लिए जरूरी है। कॉर्टिसोल शरीर में कई जरूरी काम करता है, जिनमें एनर्जी लेवल और मेटाबॉलिज्म को मैनेज करना शामिल है। यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है और नींद के चक्र को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

एक्स्ट्रा स्ट्रेस रिस्पॉन्स की वजह बन रहा है?

एक्सपर्ट का कहना है कि, 'प्रॉब्लम मोबाइल फोन से नहीं होती है बल्कि, जरूरी बात यह है कि जब आप इसे अनलॉक करते हैं तो सबसे पहले आपकी नजर किस चीज पर पड़ती है। आपका स्मार्टफोन निश्चित रूप से आपके शरीर में बहुत ज्यादा स्ट्रेस रिस्पॉन्स को ट्रिगर कर सकता है, जब लगातार नोटिफिकेशन, जागते ही तुरंत फोन चेक करने की आदत, और सोशल मीडिया की कभी न खत्म होने वाली दुनिया आपके नर्वस सिस्टम को 'फाइट-या-फ्लाइट' मोड में बंद कर देती है, जिससे कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है।' 

उन्होंने आगे कहा कि-

'साइकोलॉजिकल नजरिए से देखें तो, यह आपके दिमाग को दिन में सेटल होने से पहले ही रिएक्शन मोड में डाल देता है। हालांकि, मोबाइल फोन देखने के बाद बड़ी मात्रा में कॉर्टिसोल के अपने-आप रिलीज होने के बारे में रिसर्च से कोई सबूत नहीं मिला है।'

क्या जगते ही महसूस होता है तनाव?
 
एक्सपर्ट ने कहा कि- 'सोने के बाद भी जागते ही थकान महसूस होना खराब नींद और मानसिक थकान की निशानी है, जब रात में आराम करने के बजाय दिमाग बहुत ज्यादा एक्टिव रहता है या विचारों में उलझा रहता है, तो कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) का लेवल बढ़ जाता है, जिससे शरीर की ऊर्जा खत्म होने लगती है।  

विशेषज्ञों के अनुसार, 'सुबह जागने के तुरंत बाद स्क्रीन देखने से नर्वस सिस्टम पर दबाव पड़ता है और कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर तेजी से बढ़ जाता है।'
 
सुबह सोशल मीडिया चलाने से आ सकती है निगेटिविटी

सुबह हम सोशल मीडिया खोलते है, उसमें दूसरों की सफलता की कहानियों, यात्राओं, दूसरों का वर्कआउट रूटीन देखने से आपके मूड और आत्मविश्वास पर असर पड़ सकता है। आप डिमोटिवेट हो सकते हैं। खुद को उनसे कंपेयर करने पर मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इसलिए सुबह उठते ही फोन से जितना हो सके दूरी बनाकर रखें।

 

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