प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश-मैं रहूं न रहूं, हमेशा साथ रहूंगा… 9 दिन से पदयात्रा बंद

Premanand Maharaj Emotional Message

प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश-मैं रहूं न रहूं, हमेशा साथ रहूंगा… 9 दिन से पदयात्रा बंद

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने एकांतवास के बीच भक्तों के लिए भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा- मैं मिलूं या न मिलूं, हमेशा आपके साथ रहूंगा, भक्त हुए भावुक।

प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश-मैं रहूं न रहूं हमेशा साथ रहूंगा… 9 दिन से पदयात्रा बंद

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने अपने एकांतवास और मौन व्रत के बीच भक्तों के लिए बेहद भावुक संदेश भेजा है। इस संदेश में उन्होंने कहा कि वे भले ही सामने रहें या न रहें, लेकिन अपने भक्तों के साथ हमेशा रहेंगे।पिछले कुछ दिनों से पदयात्रा और दर्शन कार्यक्रम बंद होने के कारण देशभर के श्रद्धालु चिंतित थे। इसी बीच महाराज जी का यह संदेश सामने आया, जिसने भक्तों को भावुक कर दिया।

भक्तों से बोले- चिंता मत करो

प्रेमानंद महाराज ने अपने संदेश में कहा कि भक्तों को किसी भी तरह की चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका प्रेम हमेशा भक्तों के साथ रहेगा, चाहे वे सामने हों या न हों।उन्होंने यह भी कहा कि सच्चा ध्यान किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि राधा रानी और श्रीजी के चरणों में होना चाहिए।

“हमेशा आपके दिमाग में रहेंगे”

महाराज जी ने कहा कि गुरु का वास्तविक स्वरूप शरीर तक सीमित नहीं होता। उन्होंने समझाया कि वे बिना बोले भी अपने भक्तों के विचारों और स्मृति में हमेशा उपस्थित रहेंगे।इस संदेश को सुनकर वृंदावन और बाहर के श्रद्धालुओं में भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है।

एकांतवास को बताया भक्तों के कल्याण के लिए

महाराज जी ने स्पष्ट किया कि उनका मौन व्रत और एकांतवास किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सब भक्तों के कल्याण और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए है।उन्होंने यह भी कहा कि जो कुछ प्राप्त होना था, वह प्राप्त हो चुका है, अब सब कुछ भक्तों के हित में हो रहा है।

“खूब भजन करो, सुखी रहो”

अपने संदेश के अंत में प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को सरल जीवन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान पर भरोसा रखें, भजन करें और चिंता से दूर रहें।

17 मई से बंद है पदयात्रा

प्रेमानंद महाराज की प्रसिद्ध रात्रि पदयात्रा 17 मई से स्थगित है। हर दिन तड़के 3 बजे वह केली कुंज आश्रम से सौभरी वन तक करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल यात्रा करते थे।उनकी पदयात्रा में रोज हजारों श्रद्धालु शामिल होते थे। वीकेंड और विशेष पर्वों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती थी।17 मई की रात भी हजारों भक्त उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन शिष्यों ने लाउडस्पीकर से घोषणा की कि स्वास्थ्य कारणों से पदयात्रा फिलहाल बंद की जा रही है।

 

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