Vastu Tips For Temple: घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए पूजा घर या मंदिर का सही स्थान बेहद जरूरी है। अगर मंदिर गलत दिशा में हो तो वास्तु दोष से घर में अशांति, आर्थिक तंगी और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण नियम।
घर का मंदिर किस दिशा में होना चाहिए?
वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में मंदिर बनाना सबसे शुभ माना जाता है। यह दिशा देवताओं की दिशा कही जाती है और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र होती है। ईशान कोण में पूजा करने से मन एकाग्र रहता है और घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

अगर ईशान कोण में जगह न हो तो उत्तर या पूर्व दिशा में भी मंदिर स्थापित किया जा सकता है। पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
किन जगहों पर कभी न बनाएं मंदिर?
वास्तु नियमों के अनुसार कुछ जगहों पर मंदिर बनाना अशुभ माना जाता है।
1. शौचालय या बाथरूम के पास या सामने
2. सीढ़ियों के नीचे
3. बेडरूम में मंदिर स्थापित करने से भी बचना चाहिए।
4. रसोईघर के बिल्कुल पास
5. जगह जहां लगातार शोर-शराबा या नकारात्मक गतिविधियां होती हों
मंदिर में मूर्तियां रखते समय रखें ये जरूरी बातें
1. पूजा घर में बहुत ज्यादा मूर्तियां या तस्वीरें न रखें।
2. एक ही देवता की कई मूर्तियां रखने से बचें।
3. टूटी-फूटी, खंडित या पुरानी अनुपयोगी मूर्तियां कभी न रखें।
4. मंदिर को हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखें। समय-समय पर सफाई जरूर करें।
विशेष सलाह
मंदिर का स्थान तय करते समय घर की समग्र वास्तु प्लानिंग का भी ध्यान रखें। अगर संभव हो तो किसी वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेकर मंदिर स्थापित करें। सही दिशा में बना मंदिर न सिर्फ शांति देता है बल्कि घर की सकारात्मक ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देता है।इन सरल वास्तु टिप्स को अपनाकर आप अपने घर को सुख-समृद्धि और दिव्य ऊर्जा से भर सकते हैं।