हिमाचल प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है। कांग्रेस के पूर्व नेता नीरज भारती द्वारा सोशल मीडिया पर अपनी ही सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को लेकर उठाए गए सवालों के बाद अब भारतीय जनता पार्टी को सरकार पर हमला बोलने का नया अवसर मिल गया है। राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर रविवार को सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया है।
कार्यकर्ताओं की अनदेखी का लगाया आरोप
राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन
शिमला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हर्ष महाजन ने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को महत्व नहीं दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकर्ता जब अपनी समस्याएं या सुझाव लेकर मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचते हैं तो उन्हें मिलने का अवसर तक नहीं मिलता।
महाजन ने कहा कि कांग्रेस संगठन के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि स्थिति ऐसी बनती जा रही है कि भविष्य में कांग्रेस को अपने झंडे और संगठन को संभालने के लिए भी कार्यकर्ता ढूंढ़ना मुश्किल हो जाएगा।
2027 चुनाव को लेकर बड़ा दावा
भाजपा सांसद ने दावा किया कि प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार के कामकाज से निराश है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा की वापसी तय है। महाजन ने यह भी कहा कि अगले कुछ वर्षों में कांग्रेस के भीतर असंतोष और अधिक बढ़ेगा, जिसका सीधा असर पार्टी के राजनीतिक भविष्य पर पड़ेगा।
प्रतीकात्मक तस्वीर
जिला परिषद और बीडीसी को लेकर टिप्पणी पर घेरा
हर्ष महाजन ने मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में जिला परिषद (जेडपी) और पंचायत समिति (बीडीसी) सदस्यों को लेकर दिए गए बयान की भी आलोचना की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का अपमान बताया।
उनका कहना था कि पंचायत राज संस्थाएं लोकतंत्र की मजबूत नींव हैं और इनके प्रतिनिधियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय से पंचायती राज चुनावों को लेकर गंभीर नहीं रही है।
शपथ ग्रहण समारोह विवाद पर भी उठाए सवाल
शिमला के बचत भवन में आयोजित जिला परिषद शपथ ग्रहण समारोह के दौरान नवनिर्वाचित सदस्यों के परिजनों और समर्थकों को प्रवेश नहीं दिए जाने के मामले पर भी महाजन ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटना पहले कभी देखने को नहीं मिली और इससे सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं।

भाजपा सांसद ने दावा किया कि शिमला जिला परिषद में भाजपा समर्थित सदस्यों को स्पष्ट बहुमत प्राप्त है। उनके अनुसार, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों पर भी भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित है।