देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश समेत 9 राज्यों में सोमवार को तेज आंधी, बारिश और धूल भरे बवंडर का असर देखने को मिला। राजस्थान के चूरू, झुंझुनू और सीकर में रेत का विशाल बवंडर उठने से दिन में ही अंधेरा छा गया, जबकि दिल्ली में 92 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। खराब मौसम के कारण चार उड़ानों को जयपुर डायवर्ट करना पड़ा।
चूरू में दिन में छाया अंधेरा, कोटपूतली में बवंडर के बाद बारिश
राजस्थान के चूरू जिले में दोपहर के समय रेत का बड़ा बवंडर उठा, जिससे कुछ समय के लिए दृश्यता बेहद कम हो गई और दिन में अंधेरा जैसा माहौल बन गया। झुंझुनू और सीकर में भी धूल भरी आंधी चली। वहीं कोटपूतली-बहरोड़ क्षेत्र में बवंडर के बाद करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई।
दिल्ली में तूफानी हवाएं, 4 फ्लाइट जयपुर डायवर्ट
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आंधी और बारिश के दौरान हवाओं की रफ्तार 92 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई। मौसम खराब होने के कारण चार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को जयपुर एयरपोर्ट की ओर मोड़ना पड़ा। कई इलाकों में पेड़ गिरने और यातायात प्रभावित होने की भी खबरें सामने आईं।
उत्तर प्रदेश में आंधी-बारिश का कहर, ऑटो पर गिरा पेड़
उत्तर प्रदेश के बदायूं में तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। आंधी के दौरान एक बड़ा पेड़ चलते ऑटो पर गिर गया, जिससे एक युवती की मौत हो गई, जबकि चालक घायल हो गया। अलीगढ़ समेत कई जिलों में धूल भरी आंधी दर्ज की गई।
मानसून 19 राज्यों तक पहुंचा, लेकिन रफ्तार हुई धीमी
4 जून को केरलम में दस्तक देने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून 12 दिनों में 19 राज्यों तक पहुंच चुका है। मानसून बिहार, झारखंड और ओडिशा में आगे बढ़ गया है, जबकि उत्तर-पूर्वी दिशा में यह उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा तक पहुंच चुका है। हालांकि महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास इसकी रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है।
64 प्रतिशत कम हुई बारिश
मौसम विभाग के अनुसार 4 जून से 15 जून के बीच देश में सामान्य 53.7 मिमी वर्षा की तुलना में केवल 19.2 मिमी बारिश दर्ज हुई है। यह सामान्य से लगभग 64 प्रतिशत कम है। विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून की सुस्ती का कारण समुद्री नमी की कमी नहीं, बल्कि ऊपरी वायुमंडल में हवाओं का असामान्य पैटर्न है। पश्चिमी जेट स्ट्रीम सामान्य से अधिक दक्षिण की ओर खिसक गई है, जिससे मानसूनी हवाओं की गति प्रभावित हो रही है।