खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ छत्तीसगढ़ में खाद की बढ़ती मांग के बीच राज्य सरकार ने कालाबाजारी और अवैध भंडारण करने वालों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया है। कृषि विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में प्रदेशभर में हजारों बोरी उर्वरक जब्त किए गए हैं। लगातार हो रही छापेमारी से खाद माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार विभिन्न जिलों में हुई कार्रवाई को मिलाकर जब्त उर्वरकों की संख्या 15 से 20 हजार बोरी तक पहुंच सकती है। प्रशासन का कहना है कि किसानों को कृत्रिम खाद संकट से बचाने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।
किसानों की शिकायतों के बाद कार्रवाई
कृषि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ व्यापारी और खाद विक्रेता बड़ी मात्रा में उर्वरक का भंडारण कर बाजार में कृत्रिम कमी पैदा कर रहे हैं। इससे किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा था।इन शिकायतों के बाद सरकार ने प्रदेशव्यापी जांच अभियान शुरू किया और संदिग्ध गोदामों, दुकानों तथा भंडारण स्थलों पर छापेमारी की कार्रवाई तेज कर दी।
कोंडागांव की कार्रवाई बनी मिसाल
खाद माफियाओं के खिलाफ सख्ती की शुरुआत पिछले वर्ष कोंडागांव जिले में हुई बड़ी कार्रवाई से मानी जा रही है। उस दौरान प्रशासन ने करीब 12 हजार बोरी यूरिया जब्त कर खाद के अवैध नेटवर्क का खुलासा किया था।इसी कार्रवाई के बाद कृषि विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया तथा उर्वरक वितरण प्रणाली पर विशेष नजर रखना शुरू किया।
इन जिलों में बड़ी जब्ती
जांजगीर-चांपा में 1372 बोरी खाद जब्त
जांजगीर-चांपा जिले में कृषि विभाग ने पोड़ी और तुस्मा क्षेत्र में दो निजी खाद विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर छापा मारा। जांच के दौरान खरीद बिल, स्टॉक रजिस्टर और पीओएस मशीन के रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। इसके बाद मेसर्स सुरेश कुमार अग्रवाल और मेसर्स पटेल खाद भंडार से कुल 1372 बोरी खाद जब्त की गई। जिले में अब तक पांच बड़ी कार्रवाइयों में करीब 5000 बोरी खाद जब्त की जा चुकी है।
वितरण व्यवस्था में भी बदलाव
खाद वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार नई व्यवस्था लागू कर रही है। इसके तहत किसानों को उर्वरक वितरण से पहले बायोमेट्रिक सत्यापन कराया जाएगा और पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन अपडेट किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी बिक्री और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगेगी।
सरकार का संदेश: किसानों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
कृषि विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसानों के अधिकारों पर डाका डालने वालों के खिलाफ लाइसेंस निलंबन, माल जब्ती और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। खरीफ सीजन में धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य फसलों की बुवाई के लिए उर्वरकों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में सरकार किसी भी कीमत पर खाद की कृत्रिम कमी नहीं होने देना चाहती।