मध्य प्रदेश के देवास जिले के सतवास में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता ने ग्रामीण खेल और परंपराओं के प्रति लोगों का उत्साह एक बार फिर साबित कर दिया। आधुनिक दौर में जहां पारंपरिक खेल धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं, वहीं इस प्रतियोगिता में उमड़ी हजारों लोगों की भीड़ ने दिखा दिया कि ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपराओं का आकर्षण आज भी बरकरार है।
100 से अधिक बैलगाड़ियों ने हिस्सा लिया
प्रतियोगिता का आयोजन सतवास के तालाब मैदान में किया गया, जहां बुधवार दोपहर से शुरू हुए मुकाबले गुरुवार दोपहर तक लगातार करीब 24 घंटे चले। इस दौरान दर्शकों का उत्साह देखने लायक था। बड़ी संख्या में लोग पूरी रात मैदान और उसकी पाल पर डटे रहे और बैलगाड़ियों की रफ्तार का रोमांच देखते रहे। प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से 100 से अधिक बैलगाड़ियों ने हिस्सा लिया।
पहला स्थान हासिल किया
प्रतियोगिता के दौरान बैलों की ताकत, गति और उनके मालिकों की तैयारी ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। हर मुकाबले में जीत हासिल करने के लिए प्रतिभागियों ने पूरा दमखम दिखाया। फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जिसमें मगरिया गांव के पदम पटेल के बैल ‘शेरा’ और ‘शक्ति’ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया।
रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल प्रदान की गई
विजेता टीम को पुरस्कार स्वरूप रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल प्रदान की गई। इसके अलावा विजेता और अन्य उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को शील्ड तथा सम्मान पुरस्कार भी दिए गए। पुरस्कार वितरण समारोह में स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी भी मौजूद रहे।
आयोजकों का कहना है कि इस तरह की प्रतियोगिताएं ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वहीं दर्शकों ने भी इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह दिखाया। सतवास की यह बैलगाड़ी दौड़ न केवल खेल प्रतियोगिता बनी, बल्कि ग्रामीण जीवन, परंपरा और सामुदायिक एकता का भी अनूठा उत्सव साबित हुई।