जनगणना 2027: मध्यप्रदेश में पहला चरण पूरा, 55 हजार गांवों में हुआ डोर-टू-डोर सर्वे

मध्यप्रदेश जनगणना 2027

जनगणना 2027: मध्यप्रदेश में पहला चरण पूरा, 55 हजार गांवों में हुआ डोर-टू-डोर सर्वे

मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के पहले चरण की सफल समाप्ति। प्रगणकों ने घर-घर जाकर आवश्यक जानकारियां एकत्रित की, डिजिटल प्रणाली से संग्रहीत।

जनगणना 2027 मध्यप्रदेश में पहला चरण पूरा 55 हजार गांवों में हुआ डोर-टू-डोर सर्वे

मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 के तहत चलाए जा रहे महाअभियान का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इस चरण में राज्य के सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मकान सूचीकरण तथा मकानों की गणना का कार्य संपन्न किया गया। प्रदेश के 55 जिलों के करीब 55 हजार गांवों और सभी नगरीय क्षेत्रों में प्रगणकों ने घर-घर पहुंचकर आवश्यक जानकारी एकत्रित की। इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश की वर्तमान सामाजिक और भौतिक स्थिति का सटीक आंकलन करना है, ताकि भविष्य की योजनाओं को बेहतर ढंग से तैयार किया जा सके।

1 मई से शुरू हुआ था सर्वे अभियान

जनगणना के पहले चरण का कार्य 1 मई से शुरू किया गया था। इस दौरान प्रगणकों और पर्यवेक्षकों ने डोर-टू-डोर सर्वे के माध्यम से नागरिकों से जानकारी जुटाई। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 33 महत्वपूर्ण प्रश्नों के आधार पर मकानों की स्थिति, पेयजल, बिजली, शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं और परिवारों के पास उपलब्ध परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी एकत्रित की गई। सभी आंकड़े आधुनिक डिजिटल प्रणाली और मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से दर्ज किए गए, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनी।

आंकड़ों की गोपनीयता का रखा जाएगा पूरा ध्यान

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सर्वे के दौरान एकत्रित की गई सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रहेंगी। जनगणना अधिनियम 1948 और जनगणना नियमावली 1990 के तहत इन आंकड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। किसी भी व्यक्ति या परिवार की व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल जनसंख्या विश्लेषण, विकास योजनाओं के निर्माण और जनकल्याणकारी नीतियों के निर्धारण के लिए किया जाएगा।

फरवरी 2027 में शुरू होगा दूसरा चरण

पहले चरण की सफलता के बाद अब प्रशासन दूसरे चरण की तैयारियों में जुट गया है। जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा। इस चरण में प्रदेश की वास्तविक जनसंख्या, परिवारों के सदस्यों की संख्या, उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्रित की जाएंगी। यह आंकड़े भविष्य में विकास योजनाओं और संसाधनों के बेहतर वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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