मध्य प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड तथा जर्मन सरकार समर्थित इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना के बीच आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

अतिरिक्त आय का स्रोत भी उपलब्ध होगा
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करते हुए सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है। एग्री वोल्टाइक मॉडल के तहत खेतों में विशेष तकनीक से सोलर पैनल स्थापित किए जाएंगे, जिससे किसान एक ही भूमि पर खेती और बिजली उत्पादन दोनों कार्य कर सकेंगे। इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी उपलब्ध होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, एग्री वोल्टाइक प्रणाली में सोलर पैनलों को इस प्रकार लगाया जाता है कि खेती का कार्य प्रभावित न हो। किसान अपनी पारंपरिक फसलों की खेती जारी रखते हुए सौर ऊर्जा उत्पादन से होने वाली आय का लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं। यह मॉडल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने में भी सहायक माना जा रहा है।
किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी
राज्य सरकार का मानना है कि इस परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह पहल केंद्र और राज्य सरकार के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इंडो-जर्मन सहयोग के माध्यम से आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और विशेषज्ञता का लाभ किसानों तक पहुंचाया जाएगा। इससे कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीण विकास के नए अवसर सृजित होंगे।
यह समझौता मध्य प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।