Mithun Chakraborty 76th Birthday: बॉलीवुड के मशहूर एक्टर मिथुन चक्रवर्ती का आज 76वां जन्मदिन है। उन्होंने अपने करियर में 350 से भी ज्यादा फिल्में कर चुके है। उन्हें पिछले साल 'दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया था
वो पहले नक्सली थे। लेकिन फिर भाई के मौत के बाद वो घर लौट आएं। फिर एक्टिंग सीखने का फैसला किया। उनके जिंदगी की कहानी किसी फिल्म की स्टोरी से कम नहीं है। उनका नक्सल आंदोलन से लेकर नेशनल अवॉर्ड जीतने तक, भूखे पेट फुटपाथ पर सोने से लेकर 350 फिल्मों में एक्टिंग और अंतरराष्ट्रीय पहचान पहचान बनाने तक का सफर संघर्ष से भरा रहा।
नक्सल से बॉलीवुड तक का सफर
मिथुन ने अपने युवावस्था में नक्सली ग्रुप जॉइन कर लिया था। एक पुलिस कार्रवाई के दौरान उन्हें अंडरग्राउंड रहना पड़ा। भाई की मौत ने उन्हें झकझोर दिया और वे नक्सलवाद से बाहर निकलकर वापस घर लौटे। इसके बाद उन्होंने एक्टिंग को अपना करियर बनाने का फैसला किया।
संघर्ष भरा रहा 'मिथुन द' का जीवन
एक समय ऐसा भी था जब मिथुन चक्रवर्ती को अपनी मंजिल तलाशने के लिए भूख, तिरस्कार और तन्हाई का सामना करना पड़ा। एक्टिंग करने के लिए वो पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में दाखिला लिया। पढ़ाई पूरी करने के बाद वो सपनों की नगरी मुंबई आ गए। यहां स्टूडियो के चक्कर काटे, लेकिन हर जगह निराशा ही हाथ लगी। हालात इतने बदतर हो गए कि कई बार भूखे पेट फुटपाथ पर सोना पड़ता था।

इंटरव्यू में बताई संघर्ष की कहानी
एक इंटरव्यू में मिथुन ने अपने उस दर्द को साझा करते हुए कहा था कि -
"मैंने वो दिन देखे हैं जब मुझे भूखे पेट फुटपाथ पर सोना पड़ा। आंखों में आंसू लिए नींद आती थी। कई बार सोचता था कि अगला खाना कब मिलेगा, और अगली रात कहां सोऊंगा। मैं कई दिनों तक फुटपाथ पर ही सोता रहा हूं।"
नाम बदलकर बने थे हेलन के असिस्टेंट
करियर के शुरुआती दिनों में हेलन के असिस्टेंट बनने के लिए नाम ‘रेज’ रख लिया। सेट पर आने-जाने से फिल्मी दुनिया से जुड़े, और छोटे-मोटे रोल मिलने लगे। कुछ फिल्मों में हीरो का बॉडी डबल भी बने।
मृगया’ से मिली पहचान
मिथुन चक्रवर्ती के फिल्मी करियर की शुरुआत निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म ‘मृगया’ (1976) से हुई थी। इस फिल्म में उन्होंने एक आदिवासी युवक की भूमिका निभाई थी। जिसमें उनके अभिनय को आलोचकों और दर्शकों ने खूब सराहा। पहली ही फिल्म के लिए उन्हें 'बेस्ट एक्टर' का नेशनल अवॉर्ड मिला—जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।

मिमोह में कहा बयान
एक इंटरव्यू में उनके बेटे मिमोह चक्रवर्ती ने इस किस्से को याद करते हुए कहा -
"जब पापा को 'मृगया' के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था, तब एक रिपोर्टर उन्हें ढूंढ रहा था क्योंकि उस वक्त लोग उन्हें जानते ही नहीं थे। रिपोर्टर ने आखिरकार पापा को ढूंढ ही निकाला और कहा—'क्या आप ही वो अभिनेता हैं जिन्हें अवॉर्ड मिला है?' पापा ने जवाब दिया—'जी हां, मैं ही हूं।' फिर पापा ने शर्त रखी—'पहले मुझे खाना खिलाइए, फिर इंटरव्यू दूंगा।'
नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स (राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार)
1. 1977 – सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (Best Actor) फिल्म: मृगया
2. 1993 – सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (Best Actor) फिल्म: ताहादेर कथा (बंगाली फिल्म)
3. 1996 – सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता (Best Supporting Actor) फिल्म: स्वामी विवेकानंद
4.2022 – दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड

लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
यह पुरस्कार उन्हें भारतीय सिनेमा में दशकों तक दिए गए योगदान और अभिनय की विविधता के लिए प्रदान किया गया। इससे पहले भी मिथुन को कई राज्य स्तरीय, आलोचकों और दर्शकों के अवॉर्ड्स मिल चुके हैं, लेकिन यह पुरस्कार उनके कैरियर की स्थायित्व और प्रभावशीलता का प्रमाण है।
फिल्मफेयर अवॉर्ड्स
1. 1991 – बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर फिल्म: अग्निपथ
2. 1996 – बेस्ट परफॉर्मेंस इन ए नेगेटिव रोल फिल्म: जाल – द ट्रैप
3. 2023 - बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (नॉमिनेशन) फिल्म- द कश्मीर फाइल्स
डिस्को डांसर’ से मिथुन बने ग्लोबल सुपरस्टार
1982 की माइलस्टोन फिल्म ‘डिस्को डांसर’ ने मिथुन चक्रवर्ती के करियर को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। निर्देशक बब्बर सुभाष की इस म्यूजिकल-ड्रामा फिल्म में मिथुन ने जिमी नाम का किरदार निभाया, जिसने उन्हें घर-घर में पहचान दिला दी।
'डिस्को डांसर' भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में से है जिसने विश्वभर में ₹100 करोड़ से ज्यादा की कमाई की। हैरानी की बात ये है कि फिल्म का सबसे बड़ा कलेक्शन भारत में नहीं, बल्कि सोवियत यूनियन (USSR) में हुआ।
सफलता की रफ्तार बनी सुपरस्टार का ट्रेडमार्क
'डिस्को डांसर' के बाद मिथुन ने एक के बाद एक सुपरहिट फिल्में दीं और वो ए-लिस्टर एक्टर्स की कतार में सबसे आगे नज़र आने लगे। इनमें शामिल हैं: कसम पैदा करने वाले की (1984), कमांडो (1988), प्यार झुकता नहीं (1985), गुलामी (1985), मुझे इंसाफ चाहिए (1983), घर एक मंदिर (1984), स्वर्ग से सुंदर (1986) और प्यार का मंदिर (1988) इन फिल्मों में उन्होंने ऐक्शन, इमोशन और डांस का ऐसा मिश्रण पेश किया जो उस दौर के दर्शकों के लिए पूरी 'पैकेज' बन गया।

1989- एक साल, 17 फिल्में – एक रिकॉर्ड
मिथुन चक्रवर्ती 1980 के दशक के सबसे अधिक काम करने वाले कलाकारों में से एक थे। 1989 में उनकी एक साथ 17 फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें प्रमुख - इलाका, मुजरिम, प्रेम प्रतिज्ञा, लड़ाई, गुरू, बीस साल बाद इस रिकॉर्ड ने उन्हें एक साल में सबसे ज्यादा फिल्में करने वाले बॉलीवुड अभिनेता का खिताब दिलाया — जो आज भी बेमिसाल माना जाता है।
मिथुन चक्रवर्ती ने 2024 में कई फिल्मों में काम किया है, जिनमें "द कश्मीर फाइल्स", "प्रजापति", "कमांडो" और "शूरवीर" शामिल हैं।
4 महीने में टूटी पहली शादी
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की जिंदगी सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी कई उतार-चढ़ाव से भरी रही है। साल 1979 में उन्होंने अभिनेत्री हेलना ल्यूक से शादी की थी, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाया। महज चार महीनों के भीतर ही यह शादी टूट गई और दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया।
पहली शादी टूटने के कुछ ही महीनों बाद मिथुन ने उसी वर्ष 1979 में अभिनेत्री योगिता बाली से विवाह कर लिया। यह रिश्ता अब तक मजबूत बना हुआ है। मिथुन और योगिता के तीन बेटे हैं – मिमोह चक्रवर्ती (अभिनेता), नमाशी चक्रवर्ती, उशमेह चक्रवर्ती।
कचरे के ढेर में मिली बच्ची को बनाया बेटी
मिथुन चक्रवर्ती ने एक बेहद भावनात्मक और मानवीय फैसला लेते हुए एक बच्ची को गोद लिया था, जिसे उन्होंने ‘दिशानी चक्रवर्ती’ नाम दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बच्ची कचरे के ढेर में लावारिस हालत में मिली थी, जिसे बाद में मिथुन ने अपनाया और अपनी बेटी की तरह पाला।