छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में परीक्षा प्रणाली और डेटा सुरक्षा को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय के समर्थ (Samarth) पोर्टल के कथित रूप से हैक होने की सूचना के बाद पेपर लीक और विद्यार्थियों के संवेदनशील डेटा के दुरुपयोग की आशंकाएं जताई जा रही हैं।मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल बैठक बुलाकर जांच के लिए पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र मिलने का दावा
विश्वविद्यालय में यूजी और पीजी सहित विभिन्न विभागों की सेमेस्टर परीक्षाएं जारी हैं। इसी बीच कुछ छात्रों तक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र पहुंचने का दावा किया गया है।बताया जा रहा है कि छात्रों को जो प्रश्नपत्र पहले से मिले थे, उनमें शामिल कई प्रश्न वास्तविक परीक्षा के प्रश्नपत्रों से मेल खाते पाए गए। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभी तक प्रश्नपत्र लीक होने के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं।
32 विभागों का डेटा प्रभावित होने की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार समर्थ पोर्टल के माध्यम से संचालित कई शैक्षणिक और प्रशासनिक दस्तावेज प्रभावित हो सकते हैं। विश्वविद्यालय के लगभग 32 विभागों से संबंधित प्रश्नपत्र, परीक्षा रिकॉर्ड और अन्य गोपनीय दस्तावेजों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।हालांकि वास्तविक नुकसान और डेटा एक्सेस की सीमा का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
क्या है समर्थ पोर्टल?
समर्थ पोर्टल का उपयोग विश्वविद्यालयों में विभिन्न प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से—
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प्रवेश प्रक्रिया संचालित होती है।
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परीक्षा प्रबंधन किया जाता है।
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विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाते हैं।
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दस्तावेज सत्यापन और प्रशासनिक कार्य संपन्न होते हैं।
पोर्टल पर छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी जैसे मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, आधार संबंधी विवरण और शैक्षणिक दस्तावेज भी उपलब्ध रहते हैं। ऐसे में डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
छात्रों और अभिभावकों में चिंता
पोर्टल हैक होने की खबर सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल है। कई विद्यार्थियों ने डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है।छात्रों का कहना है कि उनकी अधिकांश शैक्षणिक और व्यक्तिगत जानकारी इसी पोर्टल पर दर्ज रहती है। ऐसे में यदि साइबर सुरक्षा में चूक हुई है तो इसका असर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों पर पड़ सकता है।
जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रो. मनीष श्रीवास्तव के अनुसार मामले की समीक्षा के बाद पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की गई है। समिति में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ तकनीकी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। समिति यह जांच करेगी कि पोर्टल में कथित सेंधमारी कैसे हुई, क्या किसी प्रकार का डेटा लीक हुआ और पेपर लीक संबंधी दावों में कितनी सच्चाई है।